दिल्ली लालकिले में हुए धमाके के बाद से फरीदाबाद का अल फलाह यूनिवर्सिटी चर्चा में है। यूनिवर्सिटी को जाँच के घेरे में रखा गया है। मंगलवार (11 नवंबर 2025) को यहाँ सर्च ऑपरेशन चलाया गया और 7 लोगों को हिरासत में लिया गया। इसके लिए सुबह से ही करीब 800 पुलिसकर्मी तैनात थे। बताया जा रहा है कि यूनिवर्सिटी के करीब 60 लोगों से पूछताछ की गई है।
आसपास के सभी मस्जिदों को भी जाँच के घेरे में लिया गया। आस-पास के गाँव के मौलानाओं, मौलवियों से पूछताछ की गई है। अब तक 4 इमामों से भी पूछताछ की गई।
यूनिवर्सिटी से जुड़े जिहादी डॉक्टर गिरफ्तार
दरअसल इस अल फलाह यूनिवर्सिटी के तीन डॉक्टरों को गिरफ्तार किया गया है। इनमें फरीदाबाद से गिरफ्तार डॉक्टर मुजम्मिल और उसकी गर्लफेंड डॉक्टर शाहीन शामिल है।
माना जा रहा है कि यूनिवर्सिटी में सफेदपोश आतंकियों को पनाह दिया गया। यानी जिन लोगों पर शक नहीं किया जा सके, उन्हें हथियार बनाया गया।
फिलहाल एजेंसियों की हर गतिविधियों पर नजर है। जिन 4 इमामों को गिरफ्तार किया गया है, उनकी व्हाट्सएप डिलीट पाई गई हैं। यानी कहीं न कहीं इन डॉक्टरों के संबंध उन इमामों से जुड़े हो सकते हैं। इसलिए मैसेज को डिलीज किया गया है।
अल फलाह यूनिवर्सिटी के कई चेहरे
ऑपइंडिया की टीम जब अल फलाह यूनिवर्सिटी पहुँची, तो उन्हें गेट पर ही रोक दिया गया। लेकिन पहचान छुपा कर जैसे तैसे गेट के अंदर टीम पहुँची, तो देखा कि कैंपस इतना बड़ा था कि दिल्ली एनसीआर में शायद इतना बड़ा कैंपस किसी दूसरी प्राइवेट यूनिवर्सिटी की नहीं होगी। कैंपस में काफी चहल पहल थी। छात्रों का हुजूम था और शिक्षक भी इधर-उधर जाते दिख रहे थे।
दूर से देखने पर ऐसा लग रहा था कि डॉक्टर मुजम्मिल की घटना से ये लोग अंजान हैं। डॉक्टर मुजम्मिल इस कैंपस में ही आता-जाता था। यहाँ वह छात्रों को पढ़ाता था।
कैंपस के अंदर खुले जगह पर कुछ लोग नमाज पढ़ रहे थे। सुरक्षा गार्ड ने साफ कहा कि वह किसी मुजम्मिल को नहीं जानते हैं। उसने कहा, “सुबह से लोग चर्चा कर रहे हैं लेकिन हमें नहीं पता।”
ऑपइंडिया की टीम जब आगे बढ़ी तो उसे बड़ा-सा अस्पताल दिखाई दिया। यहाँ मरीजों के रिश्तेदारों और दूसरे लोगों का आना जाना लगा हुआ था। बडी संख्या में मेडिकल कॉलेज की लड़कियाँ बुर्के में आ-जा रही थीं। सभी की दबी जुबान पर डॉक्टर मुजम्मिल और डॉक्टर शाहीन का नाम था।
टीम ने उनमें से कुछ लोगों से बात करने की कोशिश की। लेकिन उन्होंने डॉक्टर मुजम्मिल और डॉक्टर शाहीन के बारे में बात करने से इनकार कर दिया। कुछ लोगों ने सिर्फ ये बताया कि वो हैरान हैं न्यूज देखकर क्योंकि डॉक्टर मुजम्मिल को उन्होंने एक डॉक्टर और प्रोफेसर के तौर पर देखा है।
एक मेडिकल के छात्र ने बताया, “हमारे लिए बहुत आश्चर्य की बात है, क्योंकि डॉक्टर मुजम्मिल हमें पढ़ाते थे।”
ऑपइंडिया से एक असिस्टेंट हिन्दू प्रोफेसर ने नाम न बताने की शर्त पर कहा, यहाँ ज्यादातर स्टूडेंट्स जम्मू कश्मीर और पश्चिम उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। मुस्लिम ज्यादा हैं। अन्य धर्मों के बच्चे भी हैं। शुरुआत में जब यूनिवर्सिटी में पढ़ाना शुरू किया, तो उन्हें अपनी सुरक्षा को लेकर चिंता थी और थोड़ा अजीब माहौल लगा था। यहाँ उन्होंने देखा था कि कई प्रोफेसर लंबी दाढ़ी और मुस्लिम गेटअप में कैंपस में आते थे। डॉक्टर मुजम्मिल उनमें से एक था, जो पीले रंग की बाइक पर अक्सर कैंपस आता था। डॉक्टर मुजम्मिल कई वर्षों से वहाँ पढ़ा रहा था।
घटना के बाद डॉक्टर शाहीन की चर्चा भी आपस में खूब हो रही है। महिला प्रोफेसर ने बताया कि डॉक्टर शाहीन की गिरफ्तारी से हर कोई हैरान है। क्योंकि वह सबसे अधिक समय हमारे बीच बिताती थी। छात्र- प्रोफेसर अलग अलग अपने ग्रुप के साथ बात कर रहे हैं। लेकिन अनजान लोगों से इस मुद्दे पर बात नहीं कर रहे।
डॉक्टर शाहीन वह महिला है, जिसकी कार से अवैध हथियार बरामद हुआ। वह इस यूनिवर्सिटी में पढ़ा रही थी। महिला प्रोफेसर के मुताबिक, डॉक्टर शाहीन पहले स्विफ्ट कार से आती थी, लेकिन कुछ दिनों पहले उन्होंने नई ब्रीजा खरीदी थी।
अल फलाह यूनिवर्सिटी में घूमने के बाद ऑपइंडिया की टीम को दो अहम बातें महसूस की। पहला यहाँ अवैध गतिविधियाँ चलती हैं। दूसरी बात यह है कि यूनिवर्सिटी ऐसा केन्द्र है, जहाँ बाहरी लोगों का आना जाना लगा रहता है।
यूनिवर्सिटी के बायीं तरफ थोड़ी दूर पर मुजम्मिल का वह ठिकाना है, जहाँ से 360 किलो ग्राम अमोनियम नाइट्रेट बरामद किए गए थे। यूनिवर्सिटी के दायीं तरफ करीब 2 किलोमीटर जाने पर गाँव मिलता है फतेहपुर तगा। जहाँ पर वह जगह आती है जहाँ छोटा सा मकान है। इस मकान में डॉक्टर मुजम्मिल रहता तो नहीं था लेकिन भाड़े पर लिया हुआ था। यहाँ उसने तकरीबन 2500 किलो अमोनियम नाइट्रेट जमा कर रखा था।
यूनिवर्सिटी के दोनों तरफ जिहादी प्रोफेसर डॉक्टर मुजम्मिल के दो ठिकाने थे। वहाँ भी ऑपइंडिया की टीम पहुँची और जगह का मुआयना किया।
दिल्ली से सटा फरीदाबाद का ये यूनिवर्सिटी हर तरह से आतंकियों का अच्छा पनाहगार बन गया था। सुरक्षित होने के साथ-साथ शिक्षक कार्य से जुड़े होने पर आतंकियों पर नजर भी नहीं जा पा रही थी।
इसकी स्थापना 2014 में अल-फ़लाह चैरिटेबल ट्रस्ट ने की थी। हरियाणा निजी विश्वविद्यालय (संशोधन) अधिनियम, 2014 के माध्यम से इसे मान्यता दी गई। 2015 में यूजीसी ने इसे मान्यता दी। ये यूनिवर्सिटी करीब 70 एकड़ में फैला हुआ है। यूनिवर्सिटी के अंदर ही अल फलाह अस्पताल भी है, जहाँ लोगों का फ्री में इलाज किया जाता है। इसमें 650 बेड लगे हुए हैं। यूनिवर्सिटी के अंदर हॉस्टल, स्टाफ और डॉक्टरों के क्वाटर्स, लाइब्रेरी, लैब आदि हैं।
यूनिवर्सिटी को अल फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट चलाता है। इसके अध्यक्ष जवाद अहमद सिद्दीकी हैं। फिलहाल यहाँ के रजिस्ट्रार प्रोफेसर डॉ. मोहम्मद परवेज हैं। अब सवाल उठता है कि यूनिवर्सिटी प्रबंध को अपने प्रोफेसरों के करतूत की जानकारी थी या नहीं।
यूनिवर्सिटी प्रबंधन ने जानबूझकर यहाँ इन डॉक्टरों को रखा था ताकि इन पर किसी की नजर ना पड़े या इन डॉक्टरों ने यूनिवर्सिटी को पनाहगार के रूप में इस्तेमाल किया।







