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नक्सलियों की कमर तोड़ने में मोदी सरकार ने दिए ₹3507cr, मुआवजे-पुनर्वास में लगी बड़ी रकम: RTI, लाल आतंकियों से लड़ने वाले केंद्रीय बलों पर ₹1217cr खर्च

वामपंथी आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई अपने अंतिम चरण में है। नक्सली सरेंडर करने के लिए 3 राज्यों के मुख्यमंत्रियों को पत्र लिख कर समय देने की गुहार रहे हैं। नक्सलियों के खात्मे से जुड़ी मुहिम को लेकर ऑपइंडिया ने RTI के माध्यम केंद्र सरकार से कुछ सवाल पूछे थे, जिनके जवाब आ चुके हैं।

आरटीआई के माध्यम से पूछे गए सवाल के जवाब में गृह मंत्रालय के लेफ्ट विंग एक्स्ट्रीमिज्म डिवीजन ने बताया कि पीएम नरेंद्र मोदी के सत्ता में आने के बाद से वामपंथी आतंकवाद के खिलाफ निर्णायक जंग लड़ी जा रही है, जिस पर भारी रकम भी खर्च की गई है। मोदी सरकार ने नक्सलियों के खात्मे और उनका असर खत्म करने के लिए मोटी रकम खर्च की है।

गृह मंत्रालय ने बताया है कि साल 2014-15 से अब तक SRE स्कीम के तहत राज्यों को कुल 3,507.86 करोड़ रुपए दिए जा चुके हैं। ये रकम हथियार छोड़कर मुख्य धारा में आए नक्सलियों के पुनर्वास से लेकर नक्सलियों से खात्मे में जुटे सुरक्षा बलों पर खर्च की गई है।

मोदी सरकार द्वारा SRE के तहत जारी किया गया साल-वार फंड (सोर्स: मिनिस्ट्री ऑफ होम अफेयर्स, LWE डिवीजन)

ताजा आँकड़ों से साफ होता है कि केंद्र सरकार नक्सल प्रभावित जिलों में राज्य पुलिस की ताकत बढ़ाने, खुफिया तंत्र मजबूत करने और आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों के पुनर्वास पर लगातार बड़ा खर्च कर रही है।

पहले मिले RTI जवाबों में ऑपइंडिया को नक्सलियों के सरेंडर या मारे जाने के आँकड़े, नक्सल ऑपरेशनों में शहीद हुए जवानों की संख्या, बरामद हथियार और नक्सल क्षेत्रों में पुलिस के आधुनिकीकरण पर हुए खर्च जैसी जानकारी मिल चुकी है। यह इस श्रृंखला की तीसरी रिपोर्ट है।

इन तीनों RTI जवाबों को मिलाकर देखा जाए तो मोदी सरकार की एंटी-नक्सल रणनीति एक व्यापक ढाँचा बनाती है, जिसमें लगातार फंडिंग, योजनाबद्ध बल कार्रवाई, इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास और लंबे समय की स्थिरता सुनिश्चित करने के कदम शामिल हैं।

वित्त वर्ष 2014-15 से राज्यवार सुरक्षा संबंधी व्यय

ऑपइंडिया को मिली जानकारी के अनुसार, SRE स्कीम के तहत सबसे ज्यादा पैसा छत्तीसगढ़ को मिला है, कुल 1,219.28 करोड़ रुपए। इसके बाद झारखंड को 917.32 करोड़ रुपए दिए गए।

इसी बीच में ओडिशा को 453.62 करोड़, महाराष्ट्र को 262.53 करोड़, आंध्र प्रदेश को 182.21 करोड़, बिहार को 175.25 करोड़, तेलंगाना को 107.52 करोड़, पश्चिम बंगाल को 108.83 करोड़, मध्य प्रदेश को 38.61 करोड़, उत्तर प्रदेश को 36.37 करोड़ और केरल को 6.32 करोड़ रुपए मिले।

ये आंकड़े पहले मिले RTI जवाबों से भी मेल खाते हैं, जिनमें बताया गया था कि नक्सलवाद (LWE) से सबसे ज्यादा प्रभावित राज्य छत्तीसगढ़ और झारखंड ही हैं।

SRE के तहत राज्यवार जारी फंड (सोर्स: गृह मंत्रालय, LWE डिवीजन)

शीर्ष पाँच लाभार्थी राज्य

शीर्ष पाँच राज्यों में मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद हर साल कितनी धनराशि मिली, इसका साल-दर-साल विवरण सामने आया है।

छत्तीसगढ़ को देश में सबसे ज्यादा SRE फंड मिला है, कुल 1,219.28 करोड़ रुपए (2014-15 से अब तक)। सालाना आंकड़ों में साफ दिखता है कि जिस साल बस्तर और आस-पास के इलाकों में अभियान तेज हुए, उस साल फंड भी सबसे अधिक जारी किया गया। खासकर वित्त वर्ष 2024-25 में, जब राज्य को एक ही साल में सबसे ज्यादा राशि मिली।

छत्तीसगढ़ के लिए SRE के तहत साल-दर-साल जारी फंड (सोर्स: गृह मंत्रालय, LWE डिवीजन)

झारखंड को SRE के तहत 917.32 करोड़ मिले हैं, जिससे यह दूसरा सबसे बड़ा बेनिफिशियरी बन गया है।

SRE के तहत झारखंड के लिए साल-दर-साल जारी फंड (सोर्स: गृह मंत्रालय, LWE डिवीजन)

ओडिशा का कुल SRE सपोर्ट 453.62 करोड़ है।

ओडिशा के लिए SRE के तहत साल-दर-साल जारी किए गए फंड (सोर्स: गृह मंत्रालय, LWE डिवीजन)

महाराष्ट्र को SRE के तहत 262.53 करोड़ मिले हैं।

महाराष्ट्र के लिए SRE के तहत साल-दर-साल जारी फंड (सोर्स: गृह मंत्रालय, LWE डिवीजन)

आंध्र प्रदेश को कुल 182.21 करोड़ मिले हैं।

आंध्र प्रदेश के लिए SRE के तहत साल-दर-साल जारी किए गए फंड (सोर्स: गृह मंत्रालय, LWE डिवीजन)

SRE स्कीम में क्या-क्या शामिल है

गृह मंत्रालय की वेबसाइट के अनुसार, सिक्योरिटी रिलेटेड एक्सपेंडिचर (SRE) योजना नक्सल प्रभावित राज्यों को रीइम्बर्समेंट के आधार पर मदद देती है। इस फंड का मकसद राज्यों को नक्सल समस्या का प्रभावी ढंग से मुकाबला करने की क्षमता मजबूत करना है।

गृह मंत्रालय की वेबसाइट के अनुसार, SRE स्कीम में सुरक्षा बलों की ट्रेनिंग और ऑपरेशन से जुड़ी जरूरतें, नक्सली हिंसा में मारे गए या घायल नागरिकों और जवानों के परिवारों को मुआवज़ा, आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों का पुनर्वास, कम्युनिटी पुलिसिंग, गाँव रक्षा समिति और जागरूकता सामग्री जैसी चीजें शामिल होती हैं।

सालाना बजट में काफी बढ़ोतरी की गई है और नई मदें भी जोड़ी गई हैं, जैसे नक्सल ऑपरेशन के दौरान अपंग हुए जवानों को मुआवज़ा और संपत्ति के नुकसान पर मुआवजा। यह योजना राज्यों को मैदान में चल रहे एंटी-नक्सल अभियान की लागत वापस देकर रीइम्बर्समेंट एक तरह की ऑपरेशनल बैकबोन का काम करती है।

ANM और ACALWEM के तहत केंद्रीय एजेंसियों को दिए गए फंड

राज्यों को मदद देने के अलावा, गृह मंत्रालय (MHA) नक्सल विरोधी अभियान में लगी केंद्रीय एजेंसियों को भी फंड देता है। इसके लिए दो योजनाएँ चलती हैं, ‘असिस्टेंस टू नक्सल मैनेजमेंट’ (ANM) और ‘असिस्टेंस टू सेंट्रल एजेंसीज़ फॉर LWE मैनेजमेंट’ (ACALWEM)। गृह मंत्रालय द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, इन दोनों योजनाओं के तहत अब तक कुल 1,217.16 करोड़ रुपए जारी किए गए हैं।

ANM और ACALWEM स्कीम के तहत सेंट्रल एजेंसियों के लिए जारी फंड। (सोर्स: मिनिस्ट्री ऑफ़ होम अफेयर्स, LWE डिवीजन)

ये नतीजे क्यों मायने रखते हैं

इन सभी आंकड़ों से यह साफ होता है कि 2014 से मोदी सरकार ने नक्सल समस्या से निपटने के लिए एक बेहद व्यापक और बहु-स्तरीय रणनीति अपनाई है। SRE और SIS जैसे फंड राज्यों को मजबूती देते हैं, जबकि ANM और ACALWEM के जरिए केंद्र सरकार सीधे तौर पर बड़ी एजेंसियों को सहायता देती है। राज्यों के ऑपरेशन, बड़े पैमाने पर सरेंडर और कई नक्सलियों के खात्मे ये सब मिलकर दिखाते हैं कि सरकार की नीति में बल-प्रयोग, स्थिरता और पुनर्वास तीनों पर बराबर जोर है।

गृहमंत्री अमित शाह पहले ही घोषणा कर चुके हैं कि मार्च 2026 तक देश से नक्सलवाद खत्म कर दिया जाएगा। वह कई बार सार्वजनिक रूप से यह समयसीमा दोहरा चुके हैं।

सरकार के लगातार दबाव और समयसीमा के प्रभाव से नक्सलियों की मानसिकता पर भी असर पड़ा है। हाल ही में प्रतिबंधित CPI की महाराष्ट्र–मध्य प्रदेश–छत्तीसगढ़ स्पेशल जोनल कमेटी ने तीनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों को पत्र लिखकर अपने दो वरिष्ठ सदस्यों सोनू और सतीश के आत्मसमर्पण के फैसले का समर्थन किया और कुछ समय के लिए हिंसा रोकने की इच्छा जताई।

मोस्ट वॉन्टेड नक्सलियों में से एक माड़वी हिड़मा की मौत ने तो नक्सलियों के मनोबल को ही तोड़ कर रख दिया है। हालाँकि नक्सलियों ने पहले भी कई बार बातचीत जैसी माँगें की हैं, लेकिन गृहमंत्री अमित शाह ने साफ कहा है कि कोई बातचीत नहीं होगी, नक्सलियों को मुख्यधारा में लौटने के लिए आत्मसमर्पण ही करना होगा।

(यह रिपोर्ट मूल रूप से अंग्रेजी में अनुराग ने लिखी है, जिसको पढ़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करे)

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