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टेक्सास में बैन किया गया राहुल गाँधी के ह्यूस्टन प्रोग्राम से जुड़ा आतंकी संगठन CAIR, हमास-अलकायदा से कनेक्शन: हिंदू और भारत विरोधी कामों से जुड़ाव

टेक्सास के गवर्नर ग्रेग एबॉट ने मंगलवार (18 नवंबर 2025) को काउंसिल ऑन अमेरिकन-इस्लामिक रिलेशंस (CAIR) को राज्य कानून के तहत विदेशी आतंकवादी संगठन और अंतरराष्ट्रीय आपराधिक संगठन घोषित कर दिया। इस घोषणा में CAIR को मुस्लिम ब्रदरहुड के साथ सूचीबद्ध किया गया है, जिसे एबॉट ने इसका उत्तराधिकारी संगठन बताया।

इस फैसले के बाद दोनों संगठनों पर टेक्सास में जमीन खरीदने-बेचने पर रोक लग गई है। इसके अलावा इन संगठनों की किसी भी तरह से मदद करने वालों के लिए कड़ी नागरिक और आपराधिक सजाओं का रास्ता भी खुल गया है।

स्रोत: एक्स

घोषणा में क्या कहा गया है?

गवर्नर एबॉट के आदेश में सबसे पहले मुस्लिम ब्रदरहुड के इतिहास और विचारधारा का उल्लेख किया गया। इसमें इसे एक अंतरराष्ट्रीय इस्लामिस्ट आंदोलन बताया गया, जिसकी नींव हथियारबंद जिहाद और शरिया कानून लागू करने वाले वैश्विक खिलाफत के लक्ष्य पर रखी गई थी।

एबॉट ने इसके संस्थापक हसन अल-बन्ना और बाद में इसके सुप्रीम गाइड मोहम्मद बदी के बयानों का हवाला देकर कहा कि संगठन के उद्देश्यों में लगातार यही सोच बनी रही है। उन्होंने यह भी बताया कि मुस्लिम ब्रदरहुड का नेटवर्क दुनिया भर में फैला है, जिसमें हमास भी शामिल है, जो इसका फ़िलिस्तीनी शाखा के रूप में शुरू हुआ था।

इसके बाद आदेश में CAIR का जिक्र किया गया और इसे अमेरिका में मौजूद मुस्लिम ब्रदरहुड के नेटवर्क का हिस्सा बताया गया। एबॉट ने इसके लिए फेडरल जाँचों, होली लैंड फ़ाउंडेशन टेरर फाइनेंसिंग केस के कानूनी निष्कर्षों और कई शैक्षणिक अध्ययनों का हवाला दिया, जिनमें CAIR के हमास और उससे जुड़े ढाँचे के साथ संबंध बताए गए थे।

आदेश में यह भी कहा गया कि 2008 में FBI ने CAIR के साथ अपने आधिकारिक संबंध खत्म कर दिए थे, और 2023 में बाइडेन प्रशासन ने भी कुछ संघीय दस्तावेजों से CAIR से जुड़े उल्लेख हटा दिए थे।

घोषणा का सबसे बड़ा हिस्सा उन CAIR से जुड़े व्यक्तियों पर केंद्रित था, जिन्हें बाद में आतंकवाद से जुड़े अपराधों में पकड़ा गया या उजागर किया गया। एबॉट ने इन मामलों को उदाहरण के रूप में इस्तेमाल किया ताकि यह दिखाया जा सके कि CAIR सिर्फ विचारधारा तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका ढाँचा चरमपंथी नेटवर्कों से परिचालन स्तर पर भी जुड़ा हुआ है।

घोषणा में CAIR से जुड़े व्यक्तियों का उल्लेख

घोषणा में कई ऐसे लोगों के नाम दर्ज किए गए जो कभी CAIR के नेतृत्व, स्टाफ या फंडरेज़िंग नेटवर्क का हिस्सा रहे थे और बाद में आतंकवाद से जुड़े मामलों में दोषी पाए गए या आरोपित हुए। एबॉट ने कहा कि यह एक लंबे समय से चल रहा पैटर्न है कि CAIR ऐसे लोगों को अपने संगठन में महत्वपूर्ण जगह देता रहा है जिनके आतंकवादी संगठनों से सक्रिय संबंध रहे हैं।

सबसे प्रमुख नाम घसान इलाशी का था, CAIR टेक्सास के संस्थापक बोर्ड सदस्य और होली लैंड फाउंडेशन के कोषाध्यक्ष। उन्हें 2009 में आतंक वित्तपोषण के लिए दोषी ठहराया गया था और 65 साल की सजा मिली थी।

दूसरा नाम अब्दुरहमान आलामूदी का था, जिसने CAIR द्वारा आयोजित एक रैली में भाषण दिया था और खुद को हमास और हिज्बुल्लाह का समर्थक बताया था। बाद में वह अल-कायदा को फंडिंग करने का दोषी पाया गया।

तीसरा नाम रैंडल टॉड रोयर का था, जो CAIR में कम्युनिकेशन स्पेशलिस्ट और सिविल-राइट्स कोऑर्डिनेटर था। उसे 2004 में अल-कायदा और तालिबान की मदद की साजिश के लिए 20 साल की जेल हुई।

इसके बाद नाम आया बासेम खाफागी का, जो CAIR में कम्युनिटी रिलेशंस डायरेक्टर था। उसने 2003 में बैंक और वीजा फ्रॉड की बात कबूल की थी और उस पर पैसा कट्टरपंथी संगठनों को भेजने और अमेरिका पर आत्मघाती हमलों को बढ़ावा देने वाली सामग्री प्रकाशित करने के आरोप थे।

घोषणा में रबीह हद्दाद का नाम भी था, जो CAIR के लिए फंड जुटाता था। उसे ग्लोबल रिलीफ फ़ाउंडेशन के मामले में गिरफ्तार किया गया और बाद में देश से निकाला गया। यह संगठन 2002 में अल-कायदा को फंडिंग के चलते बंद किया गया था।

सूची में मुथन्ना अल-हनूटी का नाम भी शामिल था, मिशिगन का CAIR डायरेक्टर, जिसे 2011 में इराक के दो लाख बैरल तेल लेने और सद्दाम हुसैन की मदद के लिए प्रतिबंधों का उल्लंघन करने के आरोप में दोषी ठहराया गया।

एक और बड़ा नाम सामी अल-अरियान का था, पीआईजे (पैलेस्टीनियन इस्लामिक जिहाद) का फाइनेंसर और दोषी आतंकवादी। CAIR ने उसे 2014 में ‘Promoting Justice Award’ दिया था और 2020 के एक कार्यक्रम में भी उसे मंच दिया, जहाँ उसने CAIR का समर्थन बढ़ाने की अपील की।

घोषणा में निहाद अवाद का जिक्र था, CAIR के लंबे समय से कार्यकारी निदेशक। उन्होंने 7 अक्टूबर 2023 के हमास हमले पर खुशी जताई थी। इन गंभीर आरोपों और नामों के जवाब में CAIR ने ग्रेग एबॉट को कोर्ट में घसीटने की धमकी दी और उन्हें इजराइल फर्स्ट राजनेता कहा, साथ ही आरोप लगाया कि वह अमेरिकी मुसलमानों को बदनाम करने के लिए महीनों से एंटी-मुस्लिम माहौल बना रहे हैं।

स्रोत: एक्स

CAIR और उसका भारत विरोधी प्रचार

CAIR एक इस्लामिस्ट संगठन है, जिसने कई बार भारत और हिंदुओं के खिलाफ बयान दिए हैं। यह भी उल्लेखनीय है कि CAIR के रिश्ते आतंकी संगठन हमास से जुड़े रहे हैं। यह संगठन लगातार हिंदू-विरोधी हिंदूफोबिक अभियान और प्रोपेगैंडा फैलाता रहा है। पहले भी CAIR ने अत्यंत हिंदूफोबिक ‘Dismantling Global Hindutva’ कॉन्फ़्रेंस का खुलकर समर्थन किया था।

CAIR ने जनवरी 2022 में राणा अय्यूब की रिपोर्ट के आधार पर हिंदू-विरोधी प्रोपेगैंडा चलाया। उन्होंने प्रेस रिलीज जारी कर हिंदी फिल्म ‘सूर्यवंशी’ को थिएटरों में रिलीज न करने की माँग की और फिल्म को घृणित और खतरनाक हिंदुत्व प्रेरित एंटी-मुस्लिम प्रोपेगैंडा तक बता दिया।CAIR ने पाकिस्तानी आतंकी आफिया सिद्दीकी को भी रिहा करने की माँग की है, जो अमेरिकी सेना और FBI पर हमले के लिए 86 साल की सजा काट रही है।

उसी साल CAIR ने Still Suspect: The Impact of Structural Islamophobia नाम से रिपोर्ट जारी की और दावा किया कि अमेरिका में मुसलमानों के खिलाफ भेदभाव बढ़ रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, CAIR को एक साल में 6,720 शिकायतें मिलीं, जिनमें इमिग्रेशन, यात्रा संबंधी भेदभाव, कानून प्रवर्तन, सरकारी दखल, स्कूल घटनाएँ और फ्री स्पीच जैसे मुद्दे शामिल थे।

CAIR का दावा है कि अमेरिकी सरकार का भेदभाव मुसलमानों को अधिक प्रभावित करता है। लेकिन विरोधाभास यह है कि जो CAIR अमेरिका में इस्लामोफोबिया की शिकायत करता है, वही भारत में हिंदू-विरोधी नैरेटिव को लगातार बढ़ावा देता है।

दिसंबर 2022 में भी CAIR ने न्यू जर्सी में एक मोबाइल ट्रक पर दिखाए गए 26/11 हमले के वीडियो और लश्कर-ए-तैयबा आतंकियों के नामों पर आपत्ति जताई और इसे नफरत फैलाने वाला कहा, जबकि वीडियो में सिर्फ सच दिखाया गया था।

CAIR कई बार आफिया सिद्दीकी जैसे आतंकवादियों के समर्थन में भी खड़ा रहा है। जून 2023 में, जब कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी अमेरिका गए, तो वह सुनीता विश्वनाथ के साथ एक चर्चा में बैठे दिखाई दिए। वह HfHR नामक कट्टर हिंदू-विरोधी संगठन की सह-संस्थापक है और CAIR तथा ICNA जैसे संगठनों के लिए कार्यक्रम आयोजित करती रही है।

इसके अलावा राहुल गाँधी ने 2024 में कट्टर इस्लामिस्ट और भारत-विरोधी अमेरिकी सांसद इल्हान ओमर से भी मुलाकात की। ओमर इस्लामिस्ट एजेंडे को बढ़ावा देती हैं, मुस्लिम अपराधियों पर हुई कार्रवाई को इस्लामोफोबिया बताती हैं और आतंकवाद पर सवाल उठाने से बचती हैं।

वह 9/11 हमले को भी हल्के में लेते हुए CAIR के एक कार्यक्रम में बोली थीं कि यह कुछ लोगों ने कुछ कर दिया और इसके कारण मुसलमान अमेरिका में अपने अधिकार खो रहे हैं। इन सभी घटनाओं से CAIR के विचार, नेटवर्क और उसके भारत-विरोधी और हिंदू-विरोधी रुख स्पष्ट रूप से सामने आते हैं।

इस्लामी आतंकवादी संगठन हमास के साथ संबंध

ध्यान देने वाली बात यह है कि CAIR के रिश्ते फ़िलिस्तीनी इस्लामिक कट्टरपंथी आतंकी संगठन हमास से जुड़े रहे हैं। हमास का मानवाधिकार उल्लंघन का लंबा इतिहास है। यूरोपीय संघ, अमेरिका, कनाडा, इजरायल, जापान, ऑस्ट्रेलिया और ब्रिटेन सहित कई देशों ने हमास को आधिकारिक तौर पर आतंकी संगठन घोषित किया हुआ है।

(मूल रूप से यह रिपोर्ट अंग्रेजी में अनुराग ने लिखी है, मूल रिपोर्ट पढ़ने के लिए यहाँ लिंक करें।)

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