जिस CAA-NRC को लेकर देश भर में बड़ा विरोध हुआ और मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुँचा, आज उसी से मिलती-जुलती एक सरकारी जाँच (SIR) के डर से सैकड़ों अवैध बांग्लादेशी नागरिक भारत छोड़कर भागने को मजबूर हैं। पश्चिम बंगाल बॉर्डर पर हो रही यह ‘उल्टा पलायन’ की घटना दिखाती है कि कानूनी प्रक्रिया और अफवाहों का डर, लोगों पर कितना बड़ा असर डाल सकता है। विरोधी दल जहाँ इसे ‘राजनीतिक साजिश’ बता रहे हैं, वहीं डर की असली वजह उन अवैध प्रवासियों के पास भारतीय दस्तावेजों की कमी है।
बॉर्डर पर फँसे लोगों की हालत
पश्चिम बंगाल के हाकिमपुर बॉर्डर पर 500 से ज्यादा लोग फँसे हुए हैं, जो जल्दबाजी में अपना सामान लेकर आए हैं। ये लोग कोलकाता के आस-पास के इलाकों में सालों से रह रहे थे। ज़्यादातर घरेलू सहायक या मजदूर थे। हाकिमपुर आउटपोस्ट पर बैठे परिवार अब वही बात दोहरा रहे हैं, “कागज नहीं हैं, पकड़े जाएँगे।” यही डर उन्हें धीरे-धीरे धकेलते हुए बांग्लादेश की ओर ले आया है।
एक अवैध प्रवासी (अब्दुल मोमिन) ने खुद बताया कि SIR शुरू होने पर उसे डर लगने लगा और वह भाग आया। अगर वे भारत के नागरिक होते, तो उन्हें जाँच से डरने की कोई ज़रुरत नहीं होती। वहीं, एक और महिला तकलीमा खातून ने कहा कि मैं एक दशक से भी ज़्यादा समय से किराए के मकान में रह रही थी और घरेलू सहायिका का काम कर रही थी। मेरे पास कोई दस्तावेज़ नहीं हैं। अब मैं सतखीरा लौटना चाहती हूं।
VIDEO | West Bengal: In view of the SIR, a large numbers of Bangladeshi nationals, who had been living in Bengal for over 13 years are now lining up at Hakimpur, a border region between India and Bangladesh in West Bengal, waiting to return to their home country.(Source: Third… pic.twitter.com/ZTbJOxwe9f— Press Trust of India (@PTI_News) November 19, 2025
BSF इसे ‘रिवर्स एक्सोडस’ यानी ‘उल्टा पलायन’ कह रही है। BSF उन्हें भारत में वापस नहीं आने दे रही है और बांग्लादेशी सुरक्षा बल (BGB) उन्हें बांग्लादेश में घुसने नहीं दे रही है। नतीजा यह है कि सैकड़ों लोग बॉर्डर की जीरो लाइन पर फँसकर रह गए हैं।
CAA-NRC का डर और SIR की एंट्री
CAA (नागरिकता संशोधन कानून) 2019 में पास हुआ था। इसके विरोध में दिल्ली, असम, पश्चिम बंगाल समेत पूरे देश में हिंसक प्रदर्शन हुए थे। विरोधियों का कहना था कि NRC (नागरिकों का राष्ट्रीय रजिस्टर) के साथ मिलकर यह कानून मुस्लिम समुदाय को टारगेट करेगा।
विपक्ष ने इस मुद्दे को लेकर सुप्रीम कोर्ट में भी चुनौती दी थी। बिहार में भी SIR (विशेष गहन पुनरीक्षण) अभियान को लेकर विपक्ष ने पटना हाई कोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक विरोध किया था। हालाँकि, सुप्रीम कोर्ट ने SIR पर रोक नहीं लगाई, लेकिन आधार कार्ड को भी वैध दस्तावेज मानने का निर्देश दिया था।
अब चुनाव आयोग ने मतदाता सूची ‘साफ’ करने के लिए SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिवीज़न) अभियान चलाया है। विपक्ष, खासकर TMC, आरोप लगा रही है कि यह पश्चिम बंगाल में NRC लागू करने का छिपा हुआ तरीका है। इस डर ने अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों के बीच दहशत फैला दी है। उन्हें लग रहा है कि अब घर-घर जाकर तलाशी होगी और वे पकड़े जाएँगे।
असली समस्या अफवाह नहीं, दस्तावेज
यह घटना दिखाती है कि कानून और व्यवस्था से ज्यादा, अफवाहों और अनिश्चितता का डर लोगों को प्रभावित करता है। विरोध तो NRC/CAA का हुआ था, लेकिन SIR की सामान्य प्रक्रिया ने भी उन अवैध प्रवासियों को हिला दिया, जिनके पास भारत में रहने का कोई कानूनी दस्तावेज नहीं है।
SIR अभियान की सबसे बड़ी वजह यह है कि अवैध बांग्लादेशियों के पास वैलिड दस्तावेज नहीं है, जो उन्हें भारत में रहने का मौका दे। ऐसे में, वोट का अधिकार खोने का डर या पकड़े जाने का डर ही पलायन का कारण बन रहा है।







