दुबई एयर शो में भारतीय वायु सेना (IAF) का तेजस विमान जब क्रैश हुआ, तो हमें बहुत दुख हुआ, क्योंकि हमने अपना एक प्रशिक्षित पायलट खो दिया। यह सिर्फ एक हादसा नहीं है, बल्कि पूरे देश के लिए एक बहुत बड़ी क्षति है। इस हादसे ने यह सवाल फिर उठा दिया है कि ये हवाई करतब (यानी प्रदर्शन उड़ानें) कितने खतरनाक होते हैं। हमें यह याद रखना होगा कि ऐसे एयर शो में हादसे, हालाँकि कम होते हैं, पर दुनिया की सबसे एडवांस सेनाओं में भी हो सकते हैं, इसलिए भावनाओं में बहने के बजाय सच्चाई को समझना जरूरी है।
असल में, इन उड़ानों में विमान को उसकी पूरी ताकत दिखाने के लिए बहुत कम ऊँचाई पर और तेज गति से, जानबूझकर जोखिम भरी कलाबाजियाँ करवाई जाती हैं। ये उड़ानें सामान्य उड़ानों से बहुत अलग होती हैं, क्योंकि जरा सी भी गलती होने पर संभलने का मौका नहीं मिलता। इसीलिए, यह काम असली युद्ध की उड़ान से भी ज्यादा खतरनाक माना जाता है और शुक्रवार (21 नवंबर 2025) की घटना ने यही दुखद सच्चाई दिखाई।
शुरुआती वीडियो फुटेज देखकर विशेषज्ञों ने कहा है कि तेजस विमान मुश्किल कलाबाजी करते समय अचानक नीचे आने लगा था और उन्होंने कुछ संभावित कारण भी बताए हैं। मगर, यह बात याद रखनी चाहिए कि जाँच पूरी होने से पहले कोई भी व्यक्ति पक्के तौर पर हादसे की असली वजह नहीं बता सकता। ऐसे एडवांस फाइटर जेट के हादसे अक्सर किसी एक कारण से नहीं होते, बल्कि मशीन, पायलट, मौसम या काम करने के तरीके में हुई कई छोटी-छोटी गड़बड़ियों की एक पूरी चेन के कारण होते हैं, इसलिए हमें IAF की आधिकारिक जाँच रिपोर्ट का इंतजार करना चाहिए।
लेकिन इस हादसे ने एक बार फिर यह दिखा दिया है कि विमानन एरिया के पेशेवरों की जिदंगी कितनी खतरनाक होती है। उनके काम में कितनी बारीकियाँ और पेचीदगियाँ होती हैं। जरा सी चूक भी कई बार भयानक नतीजे ला सकती है और दुर्भाग्यवश, कभी-कभी उनकी जान भी ले सकती है।
नेगेटिव G करतब और पायलट की शारीरिक सीमाएँ
सबसे ज्यादा जिस बात पर चर्चा हो रही है, वह है ‘नेगेटिव G’ करतब (Negative G manoeuvre) का पायलट के शरीर पर पड़ने वाला असर। आम तौर पर उड़ान के दौरान, गुरुत्वाकर्षण (Gravity) खून को दिमाग से दूर खींचता है। लेकिन ‘नेगेटिव G’ की स्थिति में इसका उल्ट होता है। खून तेजी से दिमाग की तरफ जाता है। इसकी वजह से ‘रेड-आउट’ जैसी स्थिति पैदा हो सकती है, जिसमें देखने की क्षमता बहुत बिगड़ जाती है और ज्यादा गंभीर होने पर कुछ पल के लिए बेहोशी भी आ सकती है।
हवाई कलाबाजी करते समय, खासकर उल्टे होकर उड़ने के दौरान, पायलट को चक्कर आ सकते हैं, उसके रिफ्लेक्स धीमे हो सकते हैं, और सोचने-समझने की क्षमता कुछ पल के लिए कमजोर पड़ सकती है। चाहे पायलट ने कितनी भी बेहतरीन ट्रेनिंग ली हो या ‘एंटी-G सूट’ पहना हो, कोई भी इन जैविक सीमाओं से बच नहीं सकता। तेज सफ्तार और कम ऊँचाई पर, अगर पायलट एक सेकंड के लिए भी बेकाबू हो जाए, तो विमान को संभालना नामुमकिन हो जाता है। यह कारण यह नहीं बताता कि पायलट की कोई गलती थी, बल्कि यह उस कठोर सच्चाई को दिखाता है कि विमान कभी-कभी उस सीमा से भी ज्यादा अच्छा प्रदर्शन कर सकता है, जिसे इंसान का शरीर ठीक से झेल नहीं पाता।
इंजन सीज या कुछ समय के लिए पावर लॉस होना
दुर्घटना का एक और संभावित कारण इंजन की खराबी या कलाबाजी के दौरान कुछ पल के लिए इंजन की ताकत कम होना हो सकता है। उदाहरण के लिए, मार्च 2024 में जैसलमेर के पास हुए तेजस क्रैश में, जाँचकर्ताओं ने पता लगाया था कि इंजन के तेल पंप में गड़बड़ी आ गई थी, जिससे इंजन जाम (Seizure) हो गया था। हालाँकि, इस दुबई क्रैश में भी वही खराबी थी, इसका कोई सबूत नहीं है, लेकिन इससे यह पता चलता है कि जब लड़ाकू विमानों को इतनी जोरदार तरीके से उड़ाया जाता है, तो उनके इंजन तेल (Lubrication) या ईंधन सप्लाई की गड़बड़ियों के प्रति कितने कमजोर हो सकते हैं।
ऐसा इसलिए होता है क्योंकि ‘नेगेटिव G’ या लगभग शून्य गुरुत्वाकर्षण वाली स्थितियों में, इंजन का तेल और ईंधन वैसे काम नहीं करते, जैसे वे सीधी उड़ान में करते हैं। तेल के दबाव या ईंधन की सप्लाई में जरा-सी भी रुकावट आने पर इंजन कुछ देर के लिए बंद हो सकता है या उसकी ताकत घट सकती है। सामान्य उड़ान में पायलटों के पास ऊँचाई और समय होता है कि वे इंजन को फिर से चालू करने या इमरजेंसी के तरीके अपना सकें। पर, एयर शो में विमानों को लोगों को दिखाने के लिए जानबूझकर जमीन के बहुत करीब उड़ाया जाता है, ऐसे में अगर इंजन की ताकत अचानक कम हो जाए, तो बचने या संभलने का कोई मौका नहीं मिलता।
‘डिजिटल कंट्रोल’ वाला ‘फ्लाई-बाय-वायर’ सिस्टम
तेजस विमान एक ‘डिजिटल कंट्रोल’ वाला विमान है, जिसे ‘फ्लाई-बाय-वायर’ सिस्टम कहा जाता है। इसका मतलब है कि जब पायलट कोई कमांड देता है, तो वह सीधे मशीनरी तक नहीं जाती, बल्कि बीच में लगे कंप्यूटर उस कमांड को समझते हैं और फिर विमान को उड़ाते हैं। इस तकनीक से विमान बहुत तेज और फुर्तीला बन जाता है।
हालाँकि, यह सारा सिस्टम दर्जनों सेंसर से मिलने वाले सटीक डेटा पर निर्भर करता है। इसलिए, अगर अत्यधिक कलाबाजी के दौरान किसी सेंसर में कोई छोटी-सी गड़बड़ी आ जाए, या सॉफ्टवेयर में कोई उलझन पैदा हो जाए, तो विमान अचानक गलत प्रतिक्रिया दे सकता है। बेशक, इन सिस्टम की खूब जाँच की जाती है, लेकिन एयर शो में विमान को क्षमता की आखिरी हद तक उड़ाया जाता है। बहुत कम ऊँचाई पर, अगर कंट्रोल का जवाब थोड़ा सा भी देर से या गलत मिले, तो यह भयानक हो सकता है। यह समस्या केवल तेजस के साथ नहीं है, बल्कि दुनिया के दूसरे आधुनिक लड़ाकू विमानों में भी ऐसा देखा गया है।
पक्षी से टकराना या कोई बाहरी चीज निगलना
हमें हादसे के पीछे मौसम और आस-पास के माहौल से जुड़े कारणों पर भी ध्यान देना होगा। एयर शो अक्सर समुद्र के किनारों या भीड़-भाड़ वाले शहरों के पास होते हैं, जहाँ पक्षी ज्यादा होते हैं। अगर उड़ान के दौरान कोई पक्षी विमान से टकरा जाए (Bird Strike) या इंजन में कोई बाहरी चीज चली जाए, तो इससे इंजन की हवा का बहाव, जलने की प्रक्रिया या टरबाइन का काम अचानक और बुरी तरह से बिगड़ सकता है।
इतिहास में, दुनिया की सबसे एडवांस एयर फोर्सेस के विमानों के साथ भी ऐसी घटनाओं के कारण हादसे हुए हैं। एक ऊँचाई पर उड़ रहे विमान में अगर पक्षी टकराए, तो शायद पायलट बच जाए, लेकिन कम ऊँचाई पर खतरनाक कलाबाजी करते समय अगर ऐसा हो जाए, तो समय और ऊँचाई कम होने के कारण विमान को संभालना नामुमकिन हो सकता है।
मिलिट्री एक्सरसाइज के दौरान एयरशो क्रैश या दुर्घटनाएँ पहले कभी नहीं होतीं, ऐसा क्यों है?
यह समझना बहुत जरूरी है कि एयर शो में विमानों का क्रैश होना सिर्फ भारत या तेजस विमान की अकेली समस्या नहीं है। अमेरिका, रूस, फ्रांस, चीन और कई यूरोपीय देशों ने भी अपने बेहतरीन लड़ाकू विमानों को प्रदर्शन (डेमोंस्ट्रेशन) उड़ानों के दौरान हादसों में खोया है। F-16, Su-27, मिराज 2000 और MiG-29 जैसे विमान, जिनकी भरोसेमंद कार्यक्षमता कई दशकों से सिद्ध हो चुकी है, वे भी एयर शो के दौरान क्रैश हुए हैं।
ये हादसे इसलिए नहीं होते कि विमान असुरक्षित होते हैं, बल्कि इसलिए होते हैं क्योंकि एयर शो में जानबूझकर सुरक्षा की गुंजाइश कम कर दी जाती है, ताकि कलाबाजियाँ ज्यादा शानदार और नजदीक से दिख सकें। जोखिम ऐसे प्रदर्शनों का एक अटूट हिस्सा होता है। हाल के विश्वव्यापी उदाहरण देखें तो पता चलता है कि सबसे आधुनिक सेनाएँ भी हादसों से अछूती नहीं हैं।
उदाहरण के लिए, अक्टूबर 2025 में अमेरिकी नौसेना को दक्षिण चीन सागर के ऊपर दोहरे हादसे का सामना करना पड़ा था, जब USS निमित्ज विमानवाहक पोत से उड़ान भरते समय एक MH-60R सीहॉक हेलिकॉप्टर और एक F/A-18F सुपर हॉर्नेट लड़ाकू जेट आधे घंटे के भीतर ही दुर्घटनाग्रस्त हो गए थे।
अमेरिका में हुई एक और दुखद घटना ने यह दिखाया कि कंट्रोल एयर स्पेस में भी विमानन सुरक्षा कितनी नाजुक हो सकती है। वाशिंगटन डीसी के पास, रीगन नेशनल एयरपोर्ट के नजदीक, अमेरिकन एयरलाइंस के एक छोटे जेट विमान और अमेरिकी सेना के ब्लैक हॉक हेलिकॉप्टर की हवा में टक्कर होने से बड़ा हादसा हो गया।
जिस समय यह हुआ, सिविल एयरक्राफ्ट (जिसमें 60 यात्री और 4 क्रू सदस्य थे) लैंडिंग के लिए आ रहा था, तभी उसकी ट्रेनिंग मिशन पर निकले सैन्य हेलिकॉप्टर से टक्कर हो गई। टक्कर होते ही दोनों विमान बर्फीली पोटोमैक नदी में जा गिरे। अधिकारियों ने पुष्टि की कि विमान में सवार सभी 64 नागरिक और हेलिकॉप्टर में सवार तीनों सैनिक मारे गए।
हालाँकि अमेरिका में दुनिया के सबसे एडवांस एयर ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम हैं, फिर भी हादसे की वजह तुरंत पता नहीं चली, जिसके बाद राष्ट्रीय परिवहन सुरक्षा बोर्ड (NTSB) ने पूरी जाँच शुरू की। एयरपोर्ट को बंद कर दिया गया और फ्लाइट्स को मोड़ना पड़ा। बचाव दल को कई दिनों तक बर्फीले, कम रोशनी वाले पानी में जूझना पड़ा। यह घटना दिखाती है कि भले ही नागरिक और सैन्य विमानन सिस्टम कितने भी आधुनिक क्यों न हों, वे इंसानी, तकनीकी या पर्यावरणीय गलतियों के आगे अब भी कमजोर पड़ सकते हैं।
सिर्फ हमारे देश में ही नहीं, बल्कि दुनिया की सबसे ताकतवर सेनाओं में भी हादसे होते रहते हैं। जैसे, अमेरिकी नौसेना में हाल के सालों में कई बड़े हादसे हुए हैं। इससे पता चलता है कि जब काम का बोझ ज्यादा होता है, तो खतरा भी बढ़ जाता है। उदाहरण के लिए, अप्रैल 2025 में, लाल सागर में अमेरिकी जहाज (Aircraft Carrier) यूएसएस हैरी एस ट्रूमैन से लगभग $6 करोड़ की कीमत वाला एक F/A-18 सुपर हॉर्नेट लड़ाकू विमान, उसे खींचने वाले ट्रैक्टर के साथ, फिसलकर समुद्र में गिर गया था।
यह तब हुआ जब जहाज दुश्मनों से बचने की कोशिश कर रहा था और लगातार मिसाइलों के खतरे का सामना कर रहा था। सिर्फ अमेरिका ही क्यों, चीन में भी एयर शो के दौरान जानलेवा दुर्घटनाएँ हुई हैं। जैसे 2016 में, एक मशहूर पायलट मिशेल लूश की मौत हो गई थी, जब वह विमान को बहुत ऊँचाई से सीधी नीचे लाने के बाद वापस ऊपर नहीं खींच पाए थे। ये सभी घटनाएँ एक कड़वी सच्चाई बताती हैं। चाहे हम शांति के समय कोई शानदार प्रदर्शन कर रहे हों या लड़ाई के करीब वाले ऑपरेशन, ये तेज रफ्तार वाले विमान हमेशा इंसान और मशीन की आखिरी हद पर काम करते हैं। इसलिए, कोई भी देश, चाहे वह कितना भी आगे क्यों न हो, ऐसे दुखद हादसों से बच नहीं सकता।
तेजस का ऑपरेशनल ट्रैक रिकॉर्ड
तेजस विमान साल 2016 से भारतीय वायु सेना (IAF) में है और इसने अब तक हज़ारों घंटों तक सुरक्षित उड़ान भरी है, जिसमें सामान्य गश्त, अभ्यास और ट्रेनिंग मिशन सब शामिल हैं। इससे पहले जो क्रैश 2024 में जैसलमेर के पास हुआ था, उसकी वजह साफ-साफ पता चल गई थी। वह इंजन के तेल पंप की खराबी थी। उस हादसे के बाद जो सुधार किए गए, उसने दिखाया कि भारत की सैन्य विमानन सुरक्षा प्रणाली सक्रिय है और पारदर्शी तरीके से काम करती है। यह बात भी ध्यान देने लायक है कि दुबई में क्रैश उस दिन हुआ, जब सरकार ने तेल लीक होने की अफवाहों को गलत बताया था। जाँच पूरी होने से पहले ही बिना किसी संबंध वाले दावों को हादसे से जोड़ना, लोगों की समझ को गुमराह करता है और जाँच प्रक्रिया की विश्वसनीयता को कम करता है।
एक त्रासदी, कोई फैसला नहीं
यह सच है कि मार्च 2024 से अब तक भारतीय वायु सेना (IAF) ने नौ विमान खोए हैं, और यह तेजस का दूसरा हादसा है, लेकिन सिर्फ इन आँकड़ों को देखकर डरना नहीं चाहिए। हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि हमारी एयरफोर्स दुनिया के सबसे मुश्किल हवाई क्षेत्रों में काम करती है। ऐसे में, हादसे होना, भले ही दिल तोड़ने वाला हो, लेकिन तेज रफ्तार वाले सैन्य विमानन की एक दुखद सच्चाई है।
इस हादसे की जाँच के लिए कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी बिठा दी गई है और केवल उनके नतीजे ही हमें सही जवाब देंगे। जब तक जाँच पूरी नहीं होती, तब तक हमें अटकलों पर भरोसा करने के बजाय संयम रखना चाहिए और पूरी तस्वीर देखनी चाहिए। यह इंसान का स्वभाव है कि वह किसी भी असफलता का एक ही कारण जानना चाहता है, खासकर जब यह दुबई एयर शो के उस भयानक शुक्रवार (21 नवंबर 2025) की तरह इतना दुखद हो। लेकिन, अक्सर दुखद हादसों की वजह कोई एक गलती नहीं होती, बल्कि वे कई अनजाने कारणों के एक साथ मिल जाने का नतीजा होते हैं, और इनमें से कुछ कारणों का पता तो सबसे अनुभवी जाँचकर्ता भी शायद न लगा पाएँ।







